उपमा अलंकार युक्त दोहे
काव्य में जब किसी व्यक्ति या वस्तु के रूप, गुण या धर्म के आधार पर किसी अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति या वस्तु से समानता (तुलना) की जाती है, तो वहां उपमा अलंकार होता है।
इसमें "सा", "से", "सी", "सम", "समान", "सरिस", "सदृश" जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग होता है।
उपमा अलंकार के चार प्रमुख अंग होते हैं:
उपमेय:
- जिसकी तुलना की जाए (जैसे: 'हरि पद कोमल कमल से' में 'हरि पद')।
- उपमान: जिससे तुलना की जाए (जैसे: 'कमल')।
- वाचक शब्द: समानता बताने वाले शब्द ('से', 'सा', 'सी')।
- साधारण धर्म: वह गुण जो दोनों में समान हो ('कोमल' से )
उदाहरण :
"हरि पद कोमल कमल से"
- "पीपर पात सरिस मन डोला" (मन का पीतल के पत्ते की तरह डोलना)
- मुख्य पहचान:
पद्य में 'सा', 'सी', 'से', 'समान', 'सरिस', 'सदृश्य' आदि शब्दों का दिखना।
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