मुक्तक

जनता में ही दोष भरा है, रहती है अनजान ।
कौन भला है कौन बुरा है, कब करती पहचान ।।
झूठे वादों पर वे उनकी, गलती जाते भूल ।
अपनी अपनी पार्टी अपने, नेता का सम्मान ।।

अनुपम पाण्डेय 'अनहद'

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